2/11/08

भारत की पहली परमाणु पनडुब्बी तैयार


नई दिल्ली। भारत ने आगामी 26 जनवरी को अपनी पहली परमाणु पनडुब्बी का जलावतरण करने की पूरी तैयारी कर ली है, जबकि स्वाधीनता दिवस पर रुस से ली जा रही परमाणु पनडुब्बी ‘अकुला’ को नौसेना के बेड़े में शामिल किए जाने की सम्भावना है।दूसरी ओर रुस से लीज पर ली जा रही परमाणु पनडुब्बी पर प्रशिक्षण के लिए भारतीय नौसेना के करीब 40 सदस्य इस माह विभिन्न बैच में रवाना हो रहे हैं, जो ‘ब्लादिवास्तक’ (अकुला-2) पनडुब्बी पर प्रशिक्षण हासिल करेंगे।‘सब सरफेस न्यूक्लियर प्रोजेक्ट’ नाम से यह परमाणु पनडुब्बी अगले अगस्त में भारत पहुंच जाएगी और 15 अगस्त के पावन पर्व पर इसे भारतीय नौसेना के ध्वज तले ‘आईएनएस चक्र’ नाम से शामिल किए जाने की सम्भावना है।रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के सूत्रों ने कहा कि सब कुछ ठीक ठाक रहा तो गणतंत्र दिवस का सवेरा होने पर विशाखापत्तनम में उस शुष्क गोदी के कपाट खोल दिए जाएंगे, जहां गोपनीयता के अभेद्य आवरण में ‘एटीवी’ परियोजना चल रही है।सूत्रों ने बताया कि पनडुब्बी का कवच और उससे परमाणु रिएक्टर के एकीकरण का महत्वपूर्ण कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है और उससे परमाणु रिएक्टर के एकीकरण का महत्वपूर्ण कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है और उसे बंगाल की खाड़ी में उतारे जाने से पहले सभी प्रणालियों की जांच का काम भी शुरु हो चुका है।रक्षा संगठन की ओर से यह खुशखबरी ऐसे समय आई है जब हाल ही में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने देश के पनडुब्बी बेड़े की दयनीय तस्वीर पेश करते हुए कहा था कि 2012 तक भारत की आधी पनडुब्बियों की उम्र खत्म हो चुकी होगी।एटीवी को सतह के नीचे मार करने वाली परमाणु बैलेस्टिक मिसाइल के-15 से लैस करने की योजना है। इस पर सतह के नीचे से वार करने वाली ‘ब्रह्मोस’ मिसाइलें भी तैनात की जा सकती है।एटीवी से ‘आईएनएस चक्र’ की अनेक खासियतें मेल खाती हैं और उस पर प्रशिक्षण प्राप्त अधिकारी भारतीय पनडुब्बी के संचालन में काफी मददगार साबित होंगे।बारह हजार टन की ‘आकुला-2’ पनडुब्बी इस समय जापानी सागर में जांची परखी जा रही है। दस साल की लीज पर 65 करोड़ डॉलर में यह पनडुब्बी लेने का सौदा 2004 में हुआ था।भारत के बेड़े में इस समय 16 पनडुब्बियां हैं, जिनमें 12 रुस या पूर्व सोवियत संघ में बनी हैं। बाकी दो जर्मन पनडुब्बियां हैं।भारतीय नौसेना ने जनवरी 1988 में भी रुस से परमाणु पनडुब्बी लीज पर थी। यह अनुबंध तीन साल के लिए था। भारत ने इसकी लीज बढ़वाने का भी प्रयास किया लेकिन समझा जाता है कि अमेरिकी दबाव में सोवियत नेतृत्व ने भारत की मांग नहीं मानी थी।‘आकुला-2’ पनडुब्बी 650-एमएम के तारपीडो, ट्यूब-12 तारपीडो और 533-एमएम के 28 तारपीडों से लैस होगी। इन तारपीडों के स्थान पर क्रूज मिसाइलें और अन्य सबमर्सिबल हथियार भी लगाए जा सकते हैं।

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